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US AND ISRAEL ATTACK IRAN
अभी हालात यह हैं कि अमेरिका और इज़राइल ने मिलकर सीधे ईरान पर बड़े पैमाने पर सैन्य हमला शुरू कर दिया है और ईरान भी जवाबी वार कर रहा है। नीचे पूरी कहानी लगातार पैराग्राफ में, आपके ब्लॉग स्टाइल में —
US–Israel vs Iran WAR — हमले शुरू, पूरे मिडिल ईस्ट में भड़क गया तनाव
शनिवार सुबह से अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के कई शहरों पर एक बड़ा संयुक्त हमला शुरू कर दिया, जिसमें राजधानी तेहरान भी शामिल है। इस ऑपरेशन को इज़राइल की तरफ से कोडनेम “Roaring Lion” बताया गया है और इसे 2023 के बाद का सबसे बड़ा सीधे Targeted Attack माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इज़राइली हमलों का फोकस ईरान के राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व पर है, जबकि अमेरिका की फौज मिसाइल और सैन्य ढांचे को तबाह करने पर केंद्रित है। दूसरी तरफ ईरान ने भी चुप नहीं बैठते हुए इज़राइल पर मिसाइलों की बरसात शुरू कर दी और चेतावनी दी कि यदि यह हमला जारी रहा तो वह क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी बेसों को भी निशाना बनाएगा।
इज़राइल के डिफेंस मिनिस्टर Israel Katz ने साफ शब्दों में कहा कि यह एक “preemptive attack” है जो ईरान से आने वाले सुरक्षा ख़तरे को खत्म करने के लिए किया गया है। बताया जा रहा है कि तेहरान के उस इलाके पर भी मिसाइलें दागी गईं जहां आम तौर पर सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली ख़ामेनई रहते हैं, साथ ही वहीं राष्ट्रपति भवन और नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के दफ्तर भी मौजूद हैं। कई मिसाइलें इस High-Security Zone में गिरीं, हालांकि ईरान के अंदरूनी Soources का कहना है कि सर्वोच्च नेता को पहले ही किसी सुरक्षित जगह पर शिफ्ट कर दिया गया था। उधर इज़राइली सेना ने यह भी दावा किया है कि उसने पश्चिमी ईरान में कई ऐसे Launchers को टारगेट कर नष्ट कर दिया जो इज़राइल पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागने के लिए तैयार किए जा रहे थे।
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने एक Video Message में घोषणा की कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ एक “massive and ongoing military operation” शुरू कर दी है। ट्रंप ने कहा कि इस हमले का मकसद ईरान की मिसाइल इंडस्ट्री को पूरी तरह तबाह करना, उसके सैन्य ढांचे को कमजोर करना और अंत में इस “radical dictatorship” को गिराना है। उन्होंने ईरान के IRGC (Islamic Revolutionary Guard Corps) सैनिकों से अपील की कि वे हथियार डाल दें, वरना उनके लिए “certain death” यानी तय मौत की स्थिति बन जाएगी। ट्रंप काफी समय से खुले तौर पर ईरानी शासन में बदलाव (regime change) की बात करते रहे हैं और अब यह हमला उसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
यह सैन्य टकराव अचानक नहीं हुआ, इसके पीछे पिछले कई हफ्तों का भारी मिलिट्री बिल्डअप और फेल होती डिप्लोमेसी है। जनवरी से ही अमेरिका ने Middle East में Aircraft Carriers, Warships, Submarines और Fighter Jets की बड़ी तैनाती शुरू कर दी थी, ताकि जरूरत पड़ने पर वह ईरान पर सीधा हमला कर सके और साथ ही अपने बेस और इज़राइल की सुरक्षा भी कर सके। वॉशिंगटन की तीन मुख्य शर्तें थीं — ईरान हमेशा के लिए Uranium Enrichment बंद करे, अपने Ballistic Missile Programme पर कड़े Limit माने और Hamas–Hezbollah–Houthis जैसे Proxy Groups को Support करना बंद करे। ईरान ने साफ कहा कि Nuclear Programme पर कुछ सीमाओं पर बात हो सकती है अगर सख्त आर्थिक पाबंदियां हटाई जाएं, लेकिन Missiles और Regional Groups पर सौदेबाज़ी किसी हालत में स्वीकार नहीं होगी। यही Deadlock अब बम और मिसाइलों की भाषा में बदल चुका है।
ईरान ने हमले के तुरंत बाद इज़राइल पर भी Missiles दागे और चेतावनी दी कि अगर अमेरिका सीधे लड़ाई में गहराई तक उतरा तो वह खाड़ी क्षेत्र में उसके बड़े बेस जैसे Al Udeid Air Base (Qatar) आदि को भी निशाना बनाएगा — यह वही बेस है जिस पर ईरान ने पिछले साल भी Missiles दागकर अपनी Capability दिखाने की कोशिश की थी। इज़राइल की तरफ से जारी Footage में दिखाया गया कि उसकी Air Force ने पश्चिमी ईरान में उन जगहों पर स्ट्राइक की जहां सैनिक मिसाइल लॉन्चर तैयार कर रहे थे। इस बीच Gulf देशों में कच्चे तेल की सप्लाई और कीमतों पर भी खतरे के बादल मंडरा रहे हैं, क्योंकि किसी भी बड़े युद्ध की पहली सीधी चोट Global Oil Market पर पड़ती है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस Conflict की कड़ी निंदा शुरू हो गई है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख Volker Türk ने अमेरिका और इज़राइल के हमलों के साथ-साथ ईरान की जवाबी कार्रवाई की भी आलोचना करते हुए कहा कि ऐसे हमले सिर्फ “death, destruction and human misery” बढ़ाएंगे और सभी पक्षों को तुरंत बातचीत की मेज पर लौटना चाहिए। ओमान, जो अब तक अमेरिका–ईरान के बीच बैक-Channel Mediator की भूमिका निभा रहा था, ने भी बयान जारी कर कहा कि ताज़ा हमलों ने चल रही बातचीत को फिर से पटरी से उतार दिया है और उसने अमेरिका से अपील की कि वह “This is not your war” कहते हुए खुद को और ज्यादा इस जंग में न फंसाए। दूसरी तरफ Council on Foreign Relations और अन्य Global Think Tanks ने चेतावनी दी है कि अगर यह युद्ध लंबे समय तक चला तो यह सिर्फ ईरान और इज़राइल नहीं, पूरे West Asia को अस्थिर कर सकता है और पहले से चल रहे Gaza, Yemen और Lebanon जैसे मोर्चों को और ज्यादा भड़का सकता है।
