Iran STRIKES BACK — मिडिल ईस्ट में बढ़ा खौफ, US–Israel हमलों का तगड़ा जवाब

ईरान ने अब सीधे अंदाज में अपनी मंशा साफ कर दी है कि वह हमले सिर्फ झेलने नहीं वाला, बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट में मैदान बदलने की कोशिश करेगा। अमेरिकी और इज़राइली स्ट्राइक के बाद तेहरान ने तेजी से जवाबी कार्रवाई शुरू की और क्षेत्र के कई अहम टारगेट्स पर मिसाइलों की फायरिंग बढ़ा दी। इससे खाड़ी के देशों, इज़राइल और अमेरिकी बेस — तीनों तरफ एक साथ Alert का माहौल बन गया है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि ईरान फिलहाल “Measured लेकिन Visible” जवाब दे रहा है, यानी ऐसा वार जो दुनिया को उसकी ताकत दिखाए लेकिन अभी Full-Scale Regional War की लाइन पार न करे।

US BASES ON RADAR — ईरान की चेतावनी से Gulf देशों में हड़कंप

ईरान की ओर से आधिकारिक बयानों में साफ चेतावनी दी गई कि अगर तेहरान और उसके सैन्य ठिकानों पर हमले जारी रहते हैं, तो अगला Target सिर्फ इज़राइल ही नहीं होगा, बल्कि खाड़ी में फैले अमेरिकी सैन्य ठिकाने भी उसकी रेंज में होंगे। यह इशारा साफ तौर पर Qatar, Bahrain, Kuwait और UAE जैसे देशों में मौजूद एयरबेस और लॉजिस्टिक हब की तरफ है, जो पिछले कई साल से US Operations का मुख्य आधार रहे हैं। इस Warning के बाद Gulf Monarchies ने अपने-अपने Defence Rooms एक्टिव कर दिए हैं, एयरस्पेस की निगरानी बढ़ा दी गई है और कई जगह Civilian Air Traffic को Alternative Routes पर शिफ्ट किया जा रहा है। उधर Oil Markets में भी अनिश्चितता बढ़ी है, क्योंकि Strait of Hormuz किसी भी बड़े टकराव का तुरंत पहला Soft Target बन सकता है।

Israel UNDER FIRE — रॉकेट और ड्रोन अटैक, Iron Dome पर बढ़ा दबाव

इज़राइल की तरफ से रात भर Air-Raid Sirens बजने की खबरें हैं, खासकर उन शहरों में जो पहले से ही ईरान समर्थित ग्रुप्स के निशाने पर रहते आए हैं। ईरान की तरफ से सीधे और अप्रत्यक्ष दोनों तरह के हमलों के संकेत मिल रहे हैं — एक तरफ मिसाइलों और ड्रोन्स का इस्तेमाल, तो दूसरी तरफ क्षेत्र में मौजूद Proxy Groups को एक्टिव करने की कोशिश। इससे इज़राइल के Multi-Layered Air Defence System जैसे Iron Dome, David’s Sling और Arrow पर एक साथ दबाव बढ़ा है। टीवी स्टूडियो में बैठे सुरक्षा विशेषज्ञ कह रहे हैं कि इज़राइल को अब दो फ्रंट संभालने पड़ रहे हैं — एक सीधे ईरान से और दूसरा उसकी सीमाओं के आसपास मौजूद Proxy Networks से, जो किसी भी वक्त उत्तरी और दक्षिणी बॉर्डर पर तनाव भड़का सकते हैं।

Middle East ON EDGE — Arab Capitals में Emergency Meet, Diplomacy vs War

रियाद, अबू धाबी, दोहा और काहिरा जैसे बड़े Arab Capitals में रातों-रात Emergency Consultations शुरू हो गए हैं। एक तरफ लोग इस बात से डरे हुए हैं कि कहीं यह जंग उनके शहरों तक न पहुंच जाए, दूसरी तरफ सरकारें ये तय करने में जुटी हैं कि उन्हें Publicly क्या लाइन लेनी है — खुले तौर पर किसी एक Camp के साथ खड़ा होना है या Neutral रहकर Mediator बनने की कोशिश करनी है। Organisation of Islamic Cooperation और Arab League के भीतर भी Consultations चल रहे हैं कि क्या एक संयुक्त अपील जारी की जाए या पहले हालात का और इंतजार किया जाए। Diplomats की भाषा में इसे “Fragile But Escalatory” Moment कहा जा रहा है — यानी अभी भी बातचीत का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं हुआ, लेकिन हर नया धमाका उस Door को थोड़ा और बंद करता जा रहा है।

Iran WAR THEATRE — तेहरान से गाज़ा तक, एक ही फ्रेम में कई मोर्चे

ईरान की तरफ से किए जा रहे जवाबी कदमों का असर सिर्फ तेहरान और इज़राइल तक सीमित नहीं है। यह पूरा Conflict एक बड़े Regional Chessboard की तरह है, जहां गाज़ा, लेबनान, सीरिया, यमन और इराक — सब किसी न किसी रूप में जुड़े हुए हैं। Analysts का कहना है कि अगर ईरान ने फुल स्पेक्ट्रम एक्टिवेशन का फैसला किया तो Hezbollah (Lebanon), Houthis (Yemen) और इराक–सीरिया के कुछ मिलिशिया ग्रुप्स अलग-अलग दिशाओं से इज़राइल और उसके Allies पर दबाव बना सकते हैं, जो एक “Multi-Front War Scenario” तैयार कर देगा। ऐसे में किसी भी छोटे Miscalculation या गलत आकलन से पूरा मिडिल ईस्ट कई साल की अस्थिरता की तरफ धकेला जा सकता है — और यही वो खतरा है जिसको देख कर दुनिया भर के Foreign Offices इस समय रात भर जाग रहे हैं।

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