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Vikas Yadav FURLOUGH: Supreme Court का फैसला — 7 March तक बाहर रह सकेंगे Vikas Yadav
Nitish Katara हत्याकांड के दोषी Vikas Yadav को Supreme Court ने Holi त्योहार मनाने के लिए 7 March 2026 तक Furlough यानी अस्थायी रिहाई की अनुमति दे दी है। यह फैसला Justice MM Sundresh और Justice Vipul M Pancholi की Bench ने सुनाया। Court ने साफ कहा कि जेल में बंद कैदियों को ऐसे मौके मिलने से उनके Behavior में सकारात्मक बदलाव आता है और यह Prison Reform का एक जरूरी हिस्सा है।
23 साल की सजा काट चुके हैं Vikas — सिर्फ 2 साल बचे हैं
Vikas Yadav पूर्व MP DP Yadav के बेटे हैं और उन्हें साल 2002 में हुए Nitish Katara हत्याकांड में 25 साल की सजा मिली थी। अब तक वे उस सजा के 23 साल पूरे कर चुके हैं, यानी उनकी सजा खत्म होने में महज 2 साल बचे हैं। Vikas ने पहले Delhi High Court में Furlough की अर्जी लगाई थी जिसे 11 February को खारिज कर दिया गया था, जिसके बाद वे Supreme Court पहुंचे।
Katara Family का विरोध — “पहले Eligibility देखो, फिर राहत दो”
Lawyer Vrinda Bhandari ने जताई कड़ी आपत्ति
Katara Family की वकील Vrinda Bhandari ने Supreme Court में Vikas Yadav की Furlough का जोरदार विरोध किया। उन्होंने Court से कहा कि पहले यह जांचा जाए कि Vikas इस राहत के लिए Eligible हैं भी या नहीं, क्योंकि उनके Past Behavior का रिकॉर्ड अच्छा नहीं रहा है। Bhandari ने यह भी बताया कि Vikas ने April 2024 में अपनी मां की बीमारी का हवाला देकर Interim Bail ली थी और फिर बार-बार उसे Extend कराते रहे, जब तक कि Supreme Court ने उन्हें Surrender करने का आदेश नहीं दे दिया।
शादी के नाम पर भी मांगा था Furlough — निकला झूठ
वकील Vrinda Bhandari ने Court में एक और चौंकाने वाला खुलासा किया। उन्होंने बताया कि Vikas Yadav ने एक बार शादी करने के बहाने Furlough मांगी थी, लेकिन जब सबूत देखे गए तो पता चला कि वे पहले से ही शादीशुदा थे। इस पूरे इतिहास को सामने रखते हुए Katara Family ने यह भी मांग की कि Nilam Katara को Vikas के बाहर रहने के दौरान अतिरिक्त Security मुहैया कराई जाए, जिसे Supreme Court ने स्वीकार कर लिया।
Supreme Court की तल्ख टिप्पणी — “क्या तुम उसे फांसी देना चाहते हो?”
Bench ने Katara Family को लगाई फटकार
Supreme Court ने Katara Family के विरोध पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा — “You want to hang him. It is very unfortunate that even after 23 years, you are not permitting him any relief. Don’t get unnecessarily agitated.” Justice Sundresh ने अपने Madras High Court के कार्यकाल का उदाहरण देते हुए बताया कि Bomb Blast Case के Life Sentence कैदियों को जब Parole दी गई, तो उनके Behavior में जमीन-आसमान का फर्क आया। Court का मानना है कि कैदियों को समाज से जोड़े रखना और परिवार के साथ त्योहार मनाने का मौका देना उनकी Rehabilitation के लिए बेहद जरूरी है।
Nitish Katara Murder Case — 2002 का वो दर्दनाक किस्सा
प्यार की सजा बनी मौत — Vikas की बहन से था Nitish का रिश्ता
Nitish Katara हत्याकांड 2002 में हुआ था। Nitish का रिश्ता Vikas Yadav की बहन से था जो दोनों परिवारों को मंजूर नहीं था। इसी बात से नाराज होकर Vikas Yadav, उनके चचेरे भाई Vishal और एक अन्य आरोपी Sukhdev Pehelwan ने मिलकर Nitish Katara की हत्या कर दी थी। तब से Nitish की मां Nilam Katara इस Case को लड़ती रही हैं और उन्होंने कभी हार नहीं मानी।
Nilam Katara की अटूट लड़ाई — 23 साल बाद भी न्याय के लिए डटी हैं
Nilam Katara का यह संघर्ष किसी प्रेरणा से कम नहीं है। बेटे की मौत के बाद उन्होंने अकेले दम पर इस Case को Supreme Court तक लड़ा और दोषियों को सजा दिलाई। आज भी जब Vikas Yadav को कोई राहत मिलती है तो वे चुप नहीं बैठतीं और हर बार कोर्ट में अपनी आवाज बुलंद करती हैं। Supreme Court ने इस बार उनकी Security की मांग को मानकर उनकी सुरक्षा का भी ध्यान रखा है।
आगे क्या — 7 March को Surrender, Katara Family की नजरें टिकी
Supreme Court ने Vikas Yadav को आदेश दिया है कि वे 7 March 2026 को शाम 5 बजे तक Surrender कर लें। Katara Family के वकील ने यह भी आरोप लगाया कि Vikas ने जानबूझकर Delhi High Court का फैसला आने के बाद काफी समय बाद Supreme Court का रुख किया ताकि Holi का त्योहार आ जाए और उन्हें Furlough मिल जाए। अब देखना यह होगा कि Vikas समय पर Surrender करते हैं या एक बार फिर कोई नई Legal Strategy अपनाते हैं।
